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हिमाचल की धरती पर ब्लैक बैरी की सफलता, पांगणा से नई शुरुआत

                                  पांगणा में ब्लैक बैरी खेती ने बदली तस्वीर, किसानों के लिए बनी उम्मीद

शिमला,रिपोर्ट नवीन शर्मा 

पांगणा के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. जगदीश शर्मा ने प्रवासी भारतीय न्यूजीलैंड निवासी हीरालाल महाजन के सहयोग से अपने क्षेत्र में जैविक विधि से ब्लैक बैरी (Blackberry) तैयार कर एक प्रेरणादायक पहल की है।

ब्लैक बैरी के फल देखने में शहतूत की तरह आकर्षक होते हैं तथा इनमें अनेक पौष्टिक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।डॉ. शर्मा ने बताया कि यह पौधा पूर्णतः जैविक तरीके से तैयार किया गया है और इसकी बेल को बढ़ने के लिए सहारे की आवश्यकता होती है। विशेष बात यह है कि पौधारोपण के तीसरे वर्ष ही इसमें फल आने शुरू हो गए हैं, जो स्थानीय जलवायु की अनुकूलता को दर्शाता है।बागबानी विशेषज्ञ डाॅक्टर शरद गुप्ता का कहना है कि ब्लैक बैरी एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन तथा खनिज तत्वों से भरपूर मानी जाती है।  यह पहल न केवल स्वास्थ्य और पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में वैकल्पिक फल उत्पादन की संभावनाओं को भी मजबूत करती है।

ब्लैकबेरी एक पौष्टिक एवं औषधीय फल है, जो विटामिन-सी, विटामिन-के, मैंगनीज और फाइबर से भरपूर होता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन सुधारने, हृदय को स्वस्थ रखने और शरीर की सूजन कम करने में सहायक माना जाता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने, मधुमेह नियंत्रण और कैंसर से बचाव में भी लाभकारी होते हैं। साथ ही इसमें मौजूद कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन-के हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। ब्लैकबेरी के फलों के साथ इसकी पत्तियाँ भी पारंपरिक चिकित्सा में उपयोगी मानी जाती हैं।सुकेत संस्कृति साहित्य और जन-कल्याण मंच पांगणा-सुुकेत के अध्यक्ष डाॅक्टर हिमेंद्र बाली"हिम" का कहना है कि यदि इस प्रकार के फलों की खेती को बढ़ावा मिले, तो यह क्षेत्र के किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन सकती है तथा युवाओं को जैविक बागवानी की ओर प्रेरित कर सकती है।

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