हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज
शिमला ,ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया है। खंडपीठ ने इस मामले में ऊना के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश दिया है कि यदि कोई संज्ञेय अपराध बनता है, तो एसपी ऊना तुरंत एफआईआर दर्ज करें।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया है। खंडपीठ ने इस मामले में ऊना के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश दिया है कि यदि कोई संज्ञेय अपराध बनता है, तो एसपी ऊना तुरंत एफआईआर दर्ज करें।
एक मामले में लाइसेंस पर मध्य प्रदेश लिखा है, लेकिन जारी करने वाली अथॉरिटी डीटीओ ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) है, जबकि लाइसेंस नंबर उत्तर प्रदेश से शुरू हो रहा है और व्यक्ति ऊना का निवासी है। एक अन्य दस्तावेज में लाइसेंस बिहार सरकार की ओर से जारी किया दिखाया गया है, लेकिन उस पर आरटीओ सुल्तानपुर अंकित है और लाइसेंस नंबर (महाराष्ट्र) का है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि ऊना निवासी मनजीत सिंह और हरदीप कुमार नामक दो अलग-अलग व्यक्तियों के आधार कार्ड नंबर एकसमान पाए गए हैं।
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