संघर्ष और कठिन परिस्थितियों के बीच राघवी ने हासिल की बड़ी सफलता,
हमीरपुर, ब्यूरो रिपोर्ट
जिंदगी जब कम उम्र में ही सबसे कठिन इम्तिहान ले ले, तब अक्सर सपने बिखर जाते हैं। लेकिन गलोड़ खास की बेटी राघवी ने हालात के आगे झुकने की बजाय उन्हें अपनी ताकत बना लिया। पांच साल पहले माता-पिता को खोने वाली राघवी ने प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं कक्षा की मेरिट सूची में दसवां स्थान हासिल कर पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
मेरिट में नाम आने की खबर जैसे ही घर पहुंची, राघवी की आंखें भर आईं। खुशी के इस पल में सबसे पहले वह अपने दिवंगत माता-पिता की तस्वीर के सामने पहुंची, दीप जलाया और नम आंखों से तस्वीर को निहारते हुए अपनी अम्मा से बोली... आज मुझे मेरिट में देखकर मम्मी-पापा जरूर खुश हुए होंगे।
यह सुनकर पास खड़ी उनकी दादी सीता देवी की आंखें भी छलक उठीं। घर का माहौल कुछ पल के लिए भावनाओं से भर गया। करीब पांच वर्ष पहले बीमारी के चलते राघवी की मां निशा वर्मा का निधन हो गया था। मां की मौत का दर्द परिवार झेल ही रहा था कि कुछ ही दिन बाद पिता कपिल कुमार की हार्ट अटैक से मौत हो गई।
एक ही झटके में माता-पिता का साया सिर से उठ गया, लेकिन दादी सीता देवी ने पोती को टूटने नहीं दिया। महज दस वर्ष की उम्र में राघवी अनाथ हो गई। दादी सीता देवी ने पोती की पढ़ाई और परवरिश की पूरी जिम्मेदारी संभाली। हर मुश्किल में हौसला बनकर खड़ी रहीं और पोती के सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। दादी का यही संघर्ष और स्नेह आज राघवी की सबसे बड़ी पूंजी बन गया।
राघवी ने भी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। दिन-रात मेहनत, अनुशासन और लगन के दम पर उसने मेरिट सूची में जगह बनाकर साबित कर दिया कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके इरादे मजबूत होते हैं। राघवी का एक बड़ा भाई भी है, जो आईटीआई की पढ़ाई कर रहा है। आज राघवी की इस उपलब्धि ने सिर्फ परिवार ही नहीं, पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया है
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