देश सेवा और सफलता के क्षेत्र में बढ़ाया संस्थान का मान
शिमला,रिपोर्ट नवीन शर्मा
वर्ष 2026 राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल चायल के लिए अभूतपूर्व उपलब्धियों और गौरवशाली सफलताओं का वर्ष सिद्ध हुआ है। विद्यालय के पूर्व छात्रों ने सैन्य नेतृत्व, वीरता, साहसिक अभियानों एवं रक्षा प्रशिक्षण संस्थानों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिन्होंने न केवल विद्यालय बल्कि समूचे जॉर्जियन परिवार को गौरवान्वित किया है। इन उपलब्धियों ने एक बार पुनः सिद्ध कर दिया है कि राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल चायल राष्ट्र को उत्कृष्ट सैन्य नेतृत्व प्रदान करने वाली देश की अग्रणी संस्थाओं में से एक है।
वर्ष 2026 की सबसे गौरवपूर्ण उपलब्धियों में विद्यालय के पूर्व छात्र लेफ्टिनेंट विशाल कुमार (कैडेट संख्या 3953, सत्र 2014–2020) का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आया है। भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून के 158वें नियमित पाठ्यक्रम की पासिंग आउट परेड में उन्हें भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा प्रतिष्ठित “सॉर्ड ऑफ ऑनर” एवं “राष्ट्रपति स्वर्ण पदक” से सम्मानित किया गया। सॉर्ड ऑफ ऑनर भारतीय सैन्य अकादमी के सर्वश्रेष्ठ सर्वांगीण जेंटलमैन कैडेट को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है, जबकि राष्ट्रपति स्वर्ण पदक समग्र मेरिट सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले कैडेट को दिया जाता है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल चायल के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हुई है।विद्यालय के गौरव को और ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले पूर्व छात्र कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर (कैडेट संख्या 3869, सत्र 2012–2016), जो वर्तमान में 6वीं बटालियन, द पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेस) में सेवारत हैं, को आतंकवाद-रोधी अभियान में प्रदर्शित अदम्य साहस, असाधारण वीरता एवं उत्कृष्ट कर्तव्यनिष्ठा के लिए राष्ट्र के प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार “शौर्य चक्र” से अलंकृत किया गया। यह सम्मान उनकी वीरता एवं राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण का सर्वोच्च प्रमाण है।
उपलब्धियों की इस गौरवगाथा को आगे बढ़ाते हुए विद्यालय के पूर्व छात्र मेजर अखिलेश भट्ट (कैडेट संख्या 3529, सत्र 2007–2014) ने 12 सदस्यीय राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) दल का नेतृत्व करते हुए विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट को सफलतापूर्वक फतह किया। इस ऐतिहासिक अभियान के दौरान उन्होंने एवरेस्ट शिखर पर राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल चायल का ध्वज फहराकर विद्यालय का नाम विश्व की सबसे ऊँची चोटी तक पहुँचा दिया। उनकी यह उपलब्धि साहस, नेतृत्व एवं दृढ़ संकल्प का अनुपम उदाहरण है।इसी क्रम में विद्यालय के पूर्व छात्र सब लेफ्टिनेंट सचिन कुमार (कैडेट संख्या 3780, सत्र 2011–2018) ने भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला के 110वें पाठ्यक्रम में समग्र मेरिट सूची में द्वितीय स्थान प्राप्त कर प्रतिष्ठित “चीफ ऑफ नेवल स्टाफ सिल्वर मेडल” अर्जित किया। यह सम्मान भारतीय नौसेना में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को प्रदान किया जाता है और उनकी व्यावसायिक दक्षता, अनुशासन एवं नेतृत्व क्षमता का परिचायक है।विद्यालय की उपलब्धियों की इस स्वर्णिम श्रृंखला को और समृद्ध करते हुए पूर्व कैडेट बीसीसी साहिल शर्मा (कैडेट संख्या 3952, सत्र 2014–2021) को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला के 150वें पाठ्यक्रम की पासिंग आउट परेड में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित “राष्ट्रपति कांस्य पदक” प्रदान किया गया।
यह सम्मान उनकी अनुशासनप्रियता, नेतृत्व क्षमता एवं राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक है।इन सभी उपलब्धियों ने पुनः सिद्ध कर दिया है कि राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल चायल केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा, नेतृत्व, साहस, अनुशासन एवं उत्कृष्टता की सशक्त कर्मभूमि है। यहाँ से निकलने वाले कैडेट्स भारतीय सशस्त्र सेनाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा संस्थानों एवं अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।विद्यालय के प्राचार्य श्री विमल कुमार गंगवाल जैन ने सभी गौरवशाली पूर्व छात्रों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वर्ष 2026 के प्रथम अर्धवार्षिक काल में ही प्राप्त ये असाधारण उपलब्धियाँ राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल चायल की गौरवशाली विरासत, उत्कृष्ट प्रशिक्षण मानकों एवं चरित्र निर्माण की परंपरा का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि इन पूर्व छात्रों की सफलताएँ वर्तमान कैडेट्स के लिए प्रेरणास्रोत हैं तथा यह सिद्ध करती हैं कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और अथक परिश्रम से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल चायल परिवार अपने इन गौरवशाली वीर सपूतों की उपलब्धियों पर गर्व अनुभव करता है। सैन्य अकादमियों के सर्वोच्च सम्मानों से लेकर वीरता पुरस्कारों और विश्व की सर्वोच्च चोटी तक पहुँचने वाली ये विद्यालय की उत्कृष्ट परंपरा की जीवंत मिसाल हैं तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ बनी रहेंगी।

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