छात्रों को मिलेगा आसान और सुरक्षित तरीके से स्कॉलरशिप का लाभ, फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश के अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को अब चेहरे की पहचान से ही छात्रवृत्ति मिलेगी। केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया में यह बदलाव किया है।
नई व्यवस्था के तहत पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ लेने के लिए अब अपने चेहरे का डिजिटल पहचान के माध्यम से सत्यापन कराना होगा। फर्जी आवेदनों और गलत दावों पर रोक लगाने के लिए यह फैसला लिया गया है। इस बाबत उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. हरीश कुमार अवस्थी की ओर से शिक्षण संस्थान प्रमुखों को पत्र जारी किया गया। छात्रों की सुविधा के लिए मंत्रालय ने सेतु नामक नया मोबाइल एप भी शुरू किया है। यह एप राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्लेटफार्म उमंग से एकीकृत है। इसके माध्यम से विद्यार्थी घर बैठे ही आवेदन, दस्तावेज अपलोड, सत्यापन और आवेदन की स्थिति की निगरानी कर सकेंगे।
इस बदलाव से छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। लाभार्थियों की पहचान अधिक सटीक और पारदर्शी बनेगी। फर्जी लाभार्थियों और आवेदनों पर रोक लगेगी। छात्रवृत्ति की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से भेजी जाएगी, जिससे भुगतान प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी। देश के विभिन्न राज्यों और भाषाई पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए सेतु प्लेटफार्म को 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के छात्रों को अपनी मातृभाषा में आवेदन और अन्य सेवाओं का उपयोग करने में आसानी होगी। यह प्लेटफार्म फिलहाल उन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू होगा जो राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल से जुड़े हैं।

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