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पत्नी को पति के साथ रहने के आ*देश, पारिवारिक वि*वाद पर अ*दालत का अहम फै$सला

                                                   वै*वाहिक वि*वाद में न्यायालय का अहम फै*सला

काँगड़ा,ब्यूरो रिपोर्ट 

परिवार न्यायालय देहरा ने वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना से जुड़े मामले में फैसला सुनाते हुए पत्नी को पति के साथ रहने के निर्देश दिए हैं। पति ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद वैवाहिक जीवन में मायके पक्ष के हस्तक्षेप से उनका विवाद और बढ़ गया था। इसी मामले में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश सपना पांडेय की अदालत ने पत्नी को पति के साथ वैवाहिक जीवन पुनः शुरू करने का आदेश दिया है।

मामले की जानकारी के अनुसार हरिपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र के एक युवक ने अपनी पत्नी के खिलाफ हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 9 के तहत याचिका दायर की थी। इसमें याचिकाकर्ता ने कहा कि दोनों का विवाह अप्रैल 2021 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। विवाह के बाद उनके यहां एक बेटी ने जन्म लिया, जो फिलहाल अपनी मां के पास रह रही है।याचिका में पति ने आरोप लगाया था कि शादी के एक साल बाद पत्नी का व्यवहार बदलने लगा था। उसने घरेलू कामकाज को लेकर बेवजह झगड़े शुरू कर दिए और कई बार मारपीट भी की। वैवाहिक जीवन में मायके पक्ष के लोग भी दखल देते थे। इससे विवाद और ज्यादा बढ़ने लगा। पत्नी कई बार बिना बताए मायके चली जाती थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि नवंबर 2023 को पत्नी फिर से घर छोड़ कर चली गई। 

इसके बाद में जनवरी 2024 के पहले सप्ताह में वह दोबारा बिना किसी ठोस कारण के अपने मायके चली गई और फिर वापस नहीं आई। पत्नी अपने साथ शादी के समय मिले कीमती गहने और अन्य सामान भी ले गई। अदालत की कार्यवाही के दौरान पत्नी बार-बार बुलाने पर भी पेश नहीं हुईं, जिसके चलते अप्रैल 2025 को उन्हें अदालत द्वारा एकतरफा घोषित कर दिया गया। अपने पक्ष में युवक ने स्वयं गवाही दी और जरूरी शपथपत्र अदालत में पेश किए। दूसरी ओर पत्नी की तरफ से कोई जवाब या प्रतिवाद पेश नहीं किया गया और पति द्वारा लगाए गए सभी आरोप बिना किसी चुनौती के रिकॉर्ड पर बने रहे।अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर माना कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के मायके में रह रही है। इसी आधार पर अदालत ने युवक की याचिका स्वीकार करते हुए पत्नी को पति और बच्चे के साथ वैवाहिक जीवन बहाल करने के निर्देश दिए।

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