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रामदेई की गौशाला हुई जलकर राख सहायता के लिए आगे नहीं आया प्रशासन

◆जब जिला परिषद सदस्य कुशाल भारद्वाज को मिली जानकारी तो वह पहुंचे घटना स्थल पर

जोगिंद्रनगर ,जतिन लटावा  
जोगिन्दर नगर के गड़ूही गाँव की गरीब विधवा महिला राम देई की गौशाला के जलने की खबर जब जिला परिषद सदस्य कुशाल भारद्वाज को मिली तो वह घटना स्थल पर पहुंचे तथा स्वयं मौके का जायजा लिया। इस अवसर पर क्षेत्र के प्रतिष्ठित नागरिक कैप्टन भगत धरवाल, किसान नेता सुरेश कुमार, रूप सिंह, यशवंत, हरबंस, सब्बू पंकज तथा गड़ूही व बागड़ू के कई युवा भी साथ थे। कुशाल भारद्वाज ने परिजनों व गांववासियों से भी मुलाक़ात की तथा राम देई को ढांधस बँधाया। कुशाल भारद्वाज ने देखा कि 24 घंटे बीत जाने के बाद भी गौशाला के अंदर रखे घास, लकड़ियों व आँय सामान में आग सुलग रही थी। इस बीच रामदेई व अन्य गाँववासियों ने बताया कि पटवारी व कानूनगो सुबह ही मौके पर आए थे, लेकिन सरकार व प्रशासन की तरफ से उन्हें अभी तक किसी भी रूप की सहायता नहीं मिली । रामदेई भी बीमारी के कारण अस्पताल में दाखिल थी तथा घटना वाले दिन ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। बहुत साल पहले शादी के बाद ही उनके पति की मृत्यु हो गई थी तथा उनका एक बेटा है जो कि होटल में प्राईवेट नौकरी करता था, लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद दो साल से बेरोजगार है। 
घटना वाले दिन ही वह भी घर में अपनी पत्नी व बुआ को छोड़ कर नौकरी की तलाश में चंडीगढ़ को निकला था। लेकिन गौशाला व गौशाला में रखे सारे सामान के जलने की सूचना मिलने पर वह रास्ते से ही वापस लौट आया। परिवार बेहद गरीब है तथा आय का कोई साधन नहीं है। राम देई ने बताया कि गौशाला में बहुत सारा घास, लकड़ी, कुछ इममारती लकड़ी व दूसरा सामान भी रखा था जो सारा जल कर खाक हो गया। गाँव वालों की मद्द से जैसे तैसे अंदर बंधे पशुओं को तो बचा लिया, लेकिन भारी बारिश में उन पशुओं को किसी की गौशाला में बांधना पड़ा है। उनके पास तिरपाल भी नहीं है।  
कुशाल भारद्वाज ने जिला परिषद के अपने मासिक मानदेय की राशि से रामदेई को अपनी तरफ से तुरंत आर्थिक सहायता प्रदान की तथा मौके से ही प्रशासनिक अधिकारियों को फोन किया तथा तुरंत दो तिरपाल मुहैया करवाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि यदि कोई लाने के उपलब्ध नहीं है तो वे स्वयं दफ्तर में तिरपाल लेने आ जाएँगे। प्रशासन की तरफ से उन्हें आश्वस्त किया गया कि आज ही तिरपाल भिजवाने का प्रबंध करते हैं तो कुशाल भारद्वाज ने कहा कि अभी अंधेरा होने वाला है और इस वक्त भारी बारिश हो रही है तो शायद ही कोई आ पाएगा। इसलिए वे परिजनों में से किसी को साथ लेकर स्वयं ही गाड़ी लेकर लेने आ जाएँगे। जिसके बाद वे प्रभावित परिवार के गाँव के ही दो युवाओं को साथ लेकर तहसील कार्यालय पहुंचे जहां प्रशासन की तरफ से तुरंत 2 तिरपाल उपलब्ध करवा दिये। कुशाल भारद्वाज ने प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों को देर तक इंतजार करने व तिरपाल उपलब्ध करवाने के लिए धन्यवाद किया तथा रात को ही दोनों तिरपाल प्रभावित परिवार के घर पहुंचा दिये।  
कुशाल भारद्वाज ने कहा कि वे अपनी तरफ से बहुत ज्यादा सहायता तो नहीं कर पाएंगे, लेकिन जिला परिषद के तौर पर मिलने वाले मासिक वेतन की राशि आर्थिक सहायता के तौर पर दे रहा हूँ तथा और भी जरूरत होगी तो अन्य प्रकार से भी सहायता करेंगे। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने की जो जिम्मेवारी सरकार व प्रशासन की है, उसे वे तुरंत उपलब्ध करवाए। उन्होंने कहा कि पंचायत पदाधिकारियों से भी अनुरोध करेंगे की गौशाला निर्माण के लिए मनरेगा से सेल्फ डाली जाये ताकि नई गौशाला निर्माण के लिए एक लाख रूपये तक की सहायता इस परिवार को हो सके। 

इस अवसर पर सुरेश कुमार, रूप सिंह, यशवंत, हरबंस, सब्बू व पंकज ने कुशाल भारद्वाज का गरीब परिवार को अपने मानदेय में से आर्थिक सहाता करने के तथा तुरंत 2 तिरपाल उपलब्ध करवाने के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि कुशाल भारद्वाज ने कभी अपने आप को समाजसेवी नहीं कहा लेकिन समस्त जनता जानती है कि वे बनावटी व दिखावटी समाजसेवी नहीं बल्कि असली समाजसेवी हैं जो हर समय जनता के दुख-सुख में काम आते हैं। सुरेश कुमार व रूप सिंह ने बताया कि जब कोरोना के कारण लॉकडाउन लगा तो सभी बड़े नेता और समाजसेवी गायब थे, लेकिन कुशाल भारद्वाज ने किसान सभा के माध्यम से पूरे जोगिंदर नगर व जोगिंदर नगर से बाहर भी हजारों लोगों की न केवल आर्थिक सहायता की, बल्कि राशन, दवाइयाँ, मास्क, सेनिटाइजेर्स के रूप में तथा मरीजों को अस्पताल लाने ले जाने के रूप में भी 3 महीने लगातार सहायता अभियान चलाया। गड़ूही, भौरा के भी अनेक जरूरतमन्द परिवारों को इन्होंने घर आकर सहायता उपलब्ध कारवाई थी। इसके अलावा अपनी परवाह न करते हुए लॉकडाउन में फंसे हजारों लोगों के पास बनवाकर उनको उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए भी कुशाल भारद्वाज ने दिन रात काम किया था। 

सुरेश कुमार व रूप सिंह ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर ने जब कहर बरपाया तो उस समय भी कुशाल भारद्वाज ने हर जरूरतमन्द की सहायता की। दूसरी लहर के दौरान भी खुद की परवाह न करते हुए कई कोविड मरीजों को अस्पताल पहुंचाया तथा कई को उनके घर छोड़ा। जब कोरोना से हुई मौतों के दाह संस्कार में मृतक के परिजन व रिश्तेदार भी घबराते थे तो उस वक्त भी ये स्वयं शमशान घाट व घर पहुँच कर मदद करते थे तथा परिजनों को हौंसला देते थे। दूसरी लहर के दौरान जब कर्फ़्यू लगा तो इन्होंने फिर से सहायता अभियान शुरू कर सैंकड़ों जरूरतमंदों को राशन, दवाइयाँ, मास्क, सेनिटाइजर्स, ऑक्सीमीटर व थर्मामीटर घर-घर जा कर उपलब्ध करवाये। इसके अलावा ये हिमाचल प्रदेश के एक मात्र ऐसे निर्वाचित प्रतिनिधि थे जिन्होंने अपने दो साल का जिला परिषद का वेतन एडवांस में ही जरूरतमंदों को सहायता पहुंचाने के लिए दान कर दिया। रूप सिंह ने बताया कि भराडू पंचायत के रोपडू गाँव में भी जब एक परिवार के एकमात्र युवा पालनहार की कोरोना से मृत्यु हुई तो कुशाल भारद्वाज ने अपने एक महीने का पूरा वेतन उस परिवार को सहायता स्वरूप दे दिया तथा उनकी बुजुर्ग बूढ़ी बीमार माता को मेडिकल पेंशन लगवाने में भी सहायता की। ऐसे अनेक जरूरतमंद परिवारों को उन्होंने सहायता प्रदान की। जिला परिषद में जीत के बाद उन्होंने पानी, बिजली, सड़क, पुल व अन्य बेसिक समस्याओं को दूर करने में जिस तरह से काम किया है वह काबिले तारीफ है। उन्होंने कहा कि बाकी लोग चुनावों के समय समाजसेवी बन जाते हैं, लेकिन कुशाल भारद्वाज पिछले कई सालों से 12 महीने जनता की सेवा में लगे रहते हैं।  

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