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केंद्र से दिल खोलकर सहायता कर रहा है और सरकार झूठ पर झूठ बोले जा रही है

                                      हक़ीक़त को कब तक छुपायेगी सरकार, आपदा में राजनीति करना दुःखद

शिमला,रिपोर्ट नीरज डोगरा 

नेता प्रतिपक्ष ने पूरा प्रकरण बताते हुए कहा कि बरसात के कारण आई आपदा के बीच हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार की तरफ से ‘स्कीम फॉर स्पैशल असैसमैंट’ के तहत वर्ष 2023-24 के लिए 553.36 करोड़ रुपए की पहली किस्त जारी हुई हो चुकी है । यह राशि 8 अलग-अलग क्षेत्रों में विकासात्मक कार्यों पर खर्च करने के लिए दी जाती है।

 यह राशि मैडीकल एजुकेशन, भाषा, कला एवं संस्कृति, जल शक्ति, शहरी विकास, लोकनिर्माण, तकनीकी शिक्षा, लैंड रिकॉर्ड और परिवहन क्षेत्र में विकासात्मक कार्यों पर खर्च की जानी है। केंद्र सरकार से इस स्कीम के तहत 830 करोड़ रुपए का बजट मंजूर हुआ है, जिसकी पहली किस्त राज्य को मिल चुकी है। 276 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त राज्य सरकार द्वारायूटिलाइजेशन सर्टीफिकेट जमा करवाने के बाद बाद जारी होगी। इसी योजना की धनराशि के लिए पहले मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री का आभार जताया और हिमाचल में इस योजना के पैसे जारी करने का आग्रह करते हुए प्रेस वक्तव्य जारी कर दिया। 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को आपदा की इस घड़ी में इस तरह कि राजनीति से बाज आना होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दिल खोलकर मदद की। गृहमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री से आपदा के समय बात कर हर मदद का भरोसा किया। मैं दिल्ली जाकर गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री से मिला और प्रदेश के हालात से अवगत करवाया। गृहमंत्री ने तत्काल 364 करोड़ रुपये की अग्रिम आपदा राहत राशि जारी कर दी। हर कार्यकर्ता प्रदेश सरकार के साथ आपदा प्रभावितों के साथ खड़ा रहा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी मेरे आग्रह पर संसद का मानसून सत्र छोड़कर स्वयं हिमाचल आये और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया सड़कों को हुए सभी बड़े नुक़सान को दुरुस्त करने की ज़िम्मेदारी ली। नेशनल हाईवे के साथ एक किलोमीटर तक लगती राज्य सरकार के अधीन आने वाली सड़कों को भी सही करवाने के लिए कहा। आज भी एयर फ़ोर्स के जवान हेलीकॉप्टर के साथ दूर दराज के इलाक़ों में रोज़ राशन से लेकर दवाओं की आपूर्ति कर रहे हैं। इसके बाद भी बिना वजह केंद्र सरकार को कोसना न तो नैतिकता के तक़ाज़े पर ही सही है और न ही यह कभी हिमाचल की संस्कृति रही है।





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