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केंद्र सरकार जहां पहले खाद के 45 किलोग्राम के बैग पर 1,848 रुपये सब्सिडी देती थी, वह अब 635 रुपये ही मिलेगी

                            किसानों-बागवानों को झटका, इस खाद पर प्रति बैग 1,213 रुपये घटी सब्सिडी

शिमला,रिपोर्ट नीरज डोगरा 

'केंद्र सरकार ने दानेदार 12-32-16 खाद पर 1,213 रुपये प्रति बैग सब्सिडी घटाकर किसानों-बागवानों को बड़ा झटका दिया है। केंद्र सरकार जहां पहले खाद के 45 किलोग्राम के बैग पर 1,848 रुपये सब्सिडी देती थी, वह अब 635 रुपये ही मिलेगी। केंद्र ने इसे लेकर इफको के अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं। हालांकि, मार्केट में या अभी हाल के दिनों में मंगवाई खाद के दाम नहीं बढ़ेंगे। दूसरी ओर खाद की सब्सिडी खत्म करने के आदेशों के साथ केंद्र सरकार ने नए रेट भी जारी नहीं किए हैं। 12-32-16 खाद सबसे महंगी खादों में से एक है। इसका 45 किलो का एक बैग किसानों को 1,420 रुपये में मिलता है।

इसमें केंद्र सरकार की ओर से अब तक 1,848 रुपये और प्रदेश सरकार 50 रुपये की सब्सिडी देती है। एक बोरी खाद की कुल कीमत 3,318 रुपये पड़ती है। लगातार दी जाने वाली सब्सिडी से केंद्र सरकार पर करोड़ों रुपये का बोझ हर साल पड़ता है। इसे कम करने के लिए जहां विकल्प के तौर पर नैनो डीएपी और यूरिया को बाजार में उतारा गया, वहीं, अब केंद्र से सब्सिडी को 1,848 रुपये से घटाकर 635 रुपये कर दिया है। सब्सिडी में केंद्र ने सीधे तौर पर 1,213 रुपये की कटौती कर दी। हालांकि प्रदेश सरकार एक बैग पर 50 रुपये सब्सिडी देना जारी रखेगी।ध्यान रहे कि बैग में आने वाली दानेदार खाद के विकल्प के रूप में इफको ने नैनो तरल यूरिया और डीएपी को कुछ माह पहले ही बाजार में उतारा है।

इफको के अधिकारी लगातार किसानों से अपील भी कर रहे हैं कि फसलों पर तरल खाद का छिड़काव करें। हालांकि दानेदार खाद पर किसानों के बन चुके भरोसे को खत्म करना किसी चुनौती से कम नहीं।इस समय किसान गेहूं की बिजाई में जुटे हैं, लेकिन बिजाई के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली 12-32-16 खाद खत्म हो चुकी है। किसान खाद के इंतजार में इफको के गोदामों के चक्कर काट रहे हैं। वहीं अधिकारियों की मानें तो 10 दिन तक खाद की नई खेप आने की उम्मीद है।12-32-16 खाद पर सब्सिडी घटाई है, लेकिन इससे कीमतों पर असर होगा या नहीं, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। किसान नैनो यूरिया और डीएपी का इस्तेमाल अधिक करें, जो कि पर्यावरण हितैषी है और इससे सरकार पर करोड़ों रुपये की सब्सिडी का बोझ भी नहीं पड़ेगा।




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