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जंगलों में इन दिनों कराली के पेड़ बढ़ा रहे है उनकी शोभा

                                                               कचनार के फूलों से जंगलों में बहार

ऊना,ब्यूरो रिपोर्ट 

जिला ऊना के गगरेट और चिंतपूर्णी क्षेत्र के ग्रामीण भागों और जंगलों में इन दिनों फूलों से लदे कचनार यानी कराली के पेड़ जंगलों की शोभा बढ़ा रहे हैं। कराली की सब्जी न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर है। औषधीय गुणों से भरपूर कराली का उपयोग विभिन्न रोगों की आयुर्वेदिक दवाई बनाने के लिए किया जाता है।कचनार के पेड़ जंगलों में खुद ही उगे होते हैं।


 
इस पेड़ पर बसंत ऋतु में पंखुड़ियां और गुलाबी फूल खिलते हैं, जिसका ग्रामीण क्षेत्रों में सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। कराली को विषैले तत्व से रहित और जैविक गुणों से भरपूर माना जाता है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी सब्जी के साथ ही रायता बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। कचनार की कलियों का आचार भी बनता है, जो किसी औषधि से कम नहीं है।इस दिन बाजारों में कराली की सब्जी पहुंच चुकी है। जो लोग इसके गुणों और स्वाद से वाकिफ हैं, वो इसकी खूब खरीदारी कर रहे हैं।

 लोगों में शिवकुमार, संदीप, सुखविंद्र और दीपक की मानें तो गुणकारी कराली की सब्जी दुकानों पर 100 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से मिल रही है। उन्होंने कहा कि हालांकि जिन ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के खेत खलिहानों में इसके पौधे होते हैं, वह भेंट स्वरूप एक-दूसरे को कराली की सब्जी देते हैं।गोंदपुर बनेहड़ा अपर में स्थित आयुष विभाग के हैल्थ एंड वेलनेस सेंटर की एमओ डॉ. मुमताज की मानें तो कराली की सब्जी औषधीय गुणों से भरपूर है। इसकी छाल का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं के बनाने में भी किया जाता है। कराली के पेड़ की छाल शरीर के किसी भाग की गांठ को गलाने में सबसे उत्तम औषधि है। इसके अतिरिक्त रक्त विकार, त्वचा रोग जैसे खाज-खुजली, फोड़े-फुंसी के उपचार में इसकी छाल उपयोग में लाई जाती है।




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