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विश्व महावारी स्वच्छता दिवस राजकीय वरिष्ठ कन्या विद्यालय पपरोला में मनाया गया

       पीरियड्स में स्वच्छता क्यों जरूरी है, इसके लिए हर साल वर्ल्ड मेंसट्रुअल हाइजीन डे मनाया जाता है

बैजनाथ,रिपोर्ट संसार शर्मा 

 विश्व महावारी स्वच्छता दिवस राजकीय वरिष्ठ कन्या विद्यालय पपरोला में खंड चिकित्सा अधिकारी महाकाल डॉ दिलावर सिंह दियोल जी के आदेशानुसार मनाया गया। यह दिवस प्रधानाचार्य श्री मुलराज शर्मा जी की अध्यक्षता में मनाया गया।इस मौके पर खंड स्वास्थ्य शिक्षक बीरबल वर्मा ने कहा कि महावारी स्वच्छता को लेकर आज भी महिलाओं के मन में कई तरह की भ्रांतियां हैं। इन भ्रांतियों को दूर करने और पीरियड्स में स्वच्छता क्यों जरूरी है, इसके लिए हर साल वर्ल्ड मेंसट्रुअल हाइजीन डे मनाया जाता है।

पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। हर लड़की को एक उम्र के बाद पीरियड्स होते हैं। यह हर महिला के लिए बहुत ज्यादा जरूरी माना जाता है। पीरियड्स लड़कियों को हर महीने होते हैं। पीरियड्स के दौरान महिलाओं को साफ-सफाई का भी खास ध्यान रखना पड़ता है। पीरियड्स के दौरान अगर महिलाएं सफाई का ध्यान न रखें, तो इससे प्रजजन अंगों में इंफेक्शन और कई तरह की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। आज के जमाने में जब सोशल मीडिया, टीवी और यूट्यूब पर पैड्स, पीरियड्स हाइजीन को लेकर कई तरह के विज्ञापन चलाए जाते हैं, तब भी महिलाओं में पीरियड्स को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। ऐसे में पीरियड्स के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 28 मई को विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। पहली बार 28 मई को 2013 को मेंसट्रुअल हाइजीन डे मनाया गया। इसके बाद साल 2014 से हर साल 28 मई को मेंसट्रुअल हाइजीन डे मनाया जाता रहा है।इस दिन को 28 मई को मनाने का उद्देश्य बहुत खास है। दरअसल, महिलाओं को महीने से 3 से 5 दिन पीरियड होते हैं।

अमूमन पीरियड्स का सर्कल 28 दिनों का माना जाता है। यही वजह है कि मेंसट्रुअल हाइजीन डे को मानने के लिए 28 तारीख को चुना गया। इस साल मेंसट्रुअल हाइजीन डे की थीम "टुगेदर फॉर ए पीरियडफ्रेंडलीवर्ल्ड रखी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी क‌ई महिलाएं पीरियड्स के दौरान सैनिटरी पैड नहीं बल्कि घर में मौजूद कोई पुराने और गंदे कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। जिसकी वजह से महिलाओं को प्रजजन अंगों के रोग,खुजली, जलन और रैशेज की समस्या का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार आज भी कई महिलाएं पीरियड्स में कपड़ों का इस्तेमाल करती हैं। गंदे कपड़े का इस्तेमाल करने की वजह से महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर, प्रजनन मार्ग में संक्रमण, हेपेटाइटिस बी  और मूत्र मार्ग में संक्रमण जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। महिलाओं को इन बीमारियों से बचाने के लिए मेंस्ट्रुअल हाइजीन के प्रति लोगों में जागरूक किया जाता है।और सरकार द्वारा किशोरियों को सेनिटरी नैपकिन भी मुहैया करवाये जा रहे हैं।इस मौके पर भाषण प्रतियोगिता भी करवाई गई जिसमें वंशिका प्रथम, सानिया द्वितीय व प्रीति तृतीय स्थान पर रही विजेताओं को स्वास्थ्य विभाग द्वारा पुरस्कृत भी किया गया अंत में प्रधानाचार्य महोदय जी ने इस विषय पर अपने विचार रखे व उपस्थित कर्मचारियों, स्टाफ व किशोरियों का धन्यवाद किया इस मौके पर 170 के लगभग किशोरियों ने भाग लिया।





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