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मातृत्व अवकाश के दौरान सेवा नियमित करने के बाद अवकाश रद्द करने का आदेश खारिज

                                          हाईकोर्ट ने वृद्ध आश्रमों के मामले में एमसी शिमला बनाया पक्षकार

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश के दौरान सेवा नियमित करने के बाद अवकाश रद्द करने को अवैध करार देते हुए विभागीय आदेश रद्द कर दिए हैं। न्यायाधीश संदीप शर्मा की पीठ ने 13 दिसंबर 2021, 23 दिसंबर 2021 और 19 जून जून 2025 के आदेशों को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को सभी देय राशि चार सप्ताह में जारी करने के निर्देश दिए। 

देरी पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। मामला जेबीटी शिक्षिका कामिनी शर्मा से जुड़ा है, जिन्होंने 5 सितंबर 2018 को अनुबंध आधार पर सेवा शुरू की। 21 अगस्त 2021 को बच्चे के जन्म के बाद उन्होंने 180 दिन का मातृत्व अवकाश लिया। विभाग ने 21 अक्तूबर 2021 को सेवाएं नियमित कर दीं। नियमितीकरण को 22 अक्तूबर को उन्होंने मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट के साथ ज्वाइनिंग दी, यह स्पष्ट करते हुए कि वे मातृत्व अवकाश पर हैं। विभाग ने ज्वाइनिंग स्वीकार की।

दो माह बाद आदेश जारी कर अवकाश रद्द कर दिया। 23 अक्तूबर 2021 से अनुपस्थित मानते हुए अवधि को साधारण अवकाश में बदल दिया।हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वृद्ध आश्रमों से संबंधित एक मामले में शिमला नगर निगम को पक्षकार बनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने नगर निगम से कहा कि क्या वह कोई वृद्ध आश्रम चलता है। उनका रखरखाव करता है और क्या वह ऐसे किसी संस्थान को आर्थिक सहायता भी प्रदान करता है। निगम से यह जानकारी देने के लिए कोर्ट ने एक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। हिमाचल में 9 वृद्ध आश्रम और 22 डे केयर सेंटर चलाए जा रहे हैं।


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