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जनगणना 2027 को लेकर राज्य सरकार सक्रिय, अधिकारियों को सौंपीं अहम जिम्मेदारियां

                                             लापरवाही पर एक हजार रुपये तक जुर्माना और कारावास

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

राज्य सरकार ने भारत की जनगणना 2027 के लिए जिला, उपमंडल, तहसील और शहरी निकाय स्तर पर जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति को अधिसूचित कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह नियुक्तियां जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 4(2) के तहत की गई हैं।

अधिसूचना के अनुसार मंडल स्तर पर संबंधित मंडलायुक्त को मंडलीय जनगणना अधिकारी, जिला स्तर पर उपायुक्त को प्रधान जनगणना अधिकारी, अतिरिक्त उपायुक्त, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सहित अन्य नामित अधिकारियों को जिला जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा जिला राजस्व अधिकारी या अन्य जिलास्तरीय अधिकारियों को अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी का दायित्व सौंपा गया है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता की ओर से जारी इस आदेश के साथ ही प्रदेश में जनगणना 2027 की प्रशासनिक तैयारियों को औपचारिक रूप से गति मिलेगी।उपमंडल स्तर पर उपमंडलाधिकारी, तहसील व उप तहसील स्तर पर तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को प्रभारी जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया है।

 इनके सहयोग के लिए सदर कानूनगो, सांख्यिकीय सहायक, कार्यालय कानूनगो एवं संबंधित लिपिकीय संवर्ग के अधिकारियों को सहायक प्रभारी जनगणना अधिकारी के रूप में नामित किया गया है।शहरी क्षेत्रों में नगर निगम स्तर पर नगर आयुक्त को प्रधान जनगणना अधिकारी और अतिरिक्त, संयुक्त, सहायक आयुक्तों को सिटी जनगणना अधिकारी बनाया गया है। वहीं, नगर निगम, छावनी बोर्ड, नगर परिषद और नगर पंचायतों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कार्यकारी अधिकारी, अभियंता, सचिव एवं अन्य नामित अधिकारियों को प्रभारी जनगणना अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार ने संबंधित अधिकारियों को यह अधिकार भी प्रदान किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आवश्यकता के अनुसार अन्य जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति कर सकें।अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि जनगणना अधिनियम की धारा 11 के तहत जनगणना कार्य में लापरवाही, ड्यूटी से इन्कार या बाधा उत्पन्न करने पर एक हजार रुपये तक जुर्माना और दोष सिद्ध होने की स्थिति में तीन वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।



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