Ticker

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

पंचायत पुनर्गठन और विलय विवाद: राज्य चुनाव आयोग को बनाया प्रतिवादी

                          पंचायतों के पुनर्गठन पर बढ़ा विवाद, राज्य चुनाव आयोग पर उठे सवाल

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को ग्राम पंचायत घुरट के विभाजन और नई ग्राम सभा के गठन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हिमाचल प्रदेश राज्य चुनाव आयोग को इस याचिका में प्रतिवादी के रूप में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नई ग्राम सभा का गठन और पंचायतों का पुनर्गठन कानून के प्रावधानों के तहत ही किया गया है।इसके समर्थन में उपायुक्त शिमला की ओर से प्राप्त दस्तावेज भी अदालत में पेश किए गए। अदालत ने पाया कि सरकार की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों में इस बात की स्पष्ट जानकारी नहीं है कि पंचायतों के पुनर्गठन या विभाजन का प्रस्ताव वास्तव में कहां से शुरू हुआ था। इस पर सरकार ने विस्तृत रिकॉर्ड पेश करने के लिए समय की मांग, जिसे अदालत ने स्वीकार कर दिया। गौरतलब है कि पंचायत के पुनर्गठन और विलय को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई है। इन सभी याचिकाओं पर न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ बुधवार को एक साथ सुनवाई करेगी।हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने किन्नौर जिले में सोरंग पावर प्राइवेट लिमिटेड जल विद्युत परियोजना के कारण विस्थापित और प्रभावित हुए परिवारों को रोजगार देने से जुड़े मामले में जांच का आदेश दिया है।

अदालत ने उपायुक्त जिला किन्नौर को आदेश दिए हैं कि पुनर्वास परियोजना के प्रशासक होने के नाते वह सभी हितधारकों और संबंधित पक्षों को शामिल करते हुए कानून के अनुसार याचिकाकर्ताओं की शिकायतों की जांच करें और 12 सप्ताह के भीतर उचित निर्णय लें।न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने कहा कि उपायुक्त किन्नौर इस योजना के अधिकृत प्रशासक हैं, इसलिए यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह सभी पक्षों को सुनकर उचित निर्णय लें। अदालत ने याचिकाकर्ता सुरजन कुमार सहित कुल 14 समान याचिकाओं पर एक साथ यह फैसला दिया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वर्ष 2004 में राज्य सरकार और परियोजना प्रबंधन के बीच हुए समझौते के अनुसार प्रत्येक विस्थापित परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिया जाना अनिवार्य था। वर्ष 2006 के कार्यान्वयन समझौते और 2007 की पुनर्वास योजना के बावजूद उन्हें रोजगार नहीं मिला। उन्होंने बताया कि निजी कंपनी और प्रशासन ने रोजगार की शर्तों का उल्लंघन किया है। 


Post a Comment

0 Comments

📚 प्राथमिक पाठशाला ओल्वा का विलय रद्द, अभिभावकों में खुशी