उपकर और नीतिगत बदलावों से राजस्व बढ़ाएगी सरकार
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए कई स्तरों पर सख्त और व्यापक कदम उठाए हैं। शुक्रवार को विधानसभा में भाजपा विधायक राजेश जम्वाल की ओर से पूछे सवाल का लिखित जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व बढ़ाने और अनुत्पादक खर्चों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।
सभी विभागों, बोर्डों और निगमों में मितव्ययता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने राज्य की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए कई स्तरों पर सख्त और व्यापक कदम उठाए हैं। शुक्रवार को विधानसभा में भाजपा विधायक राजेश जम्वाल की ओर से पूछे सवाल का लिखित जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व बढ़ाने और अनुत्पादक खर्चों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। सभी विभागों, बोर्डों और निगमों में मितव्ययता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निर्देश जारी किए गए हैं।
सरकार ने आय बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में नए उपकर (सेस) लगाए हैं। इनमें शराब बिक्री, बिजली खपत, खनिज और प्राकृतिक खेती जैसे क्षेत्रों पर सेस शामिल हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश सद्भावना लेगेसी केस रिजॉल्यूशन स्कीम फेज-2 भी लागू की गई है, जिससे राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी की उम्मीद है। सरकार ने हिमाचल प्रदेश जल विद्युत उत्पादन पर जल उपकर अधिनियम 2023 लागू किया है, जिससे लगभग 1000 करोड़ रुपये वार्षिक आय का अनुमान है। हालांकि यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। इसके अलावा भू-राजस्व (संशोधन) अधिनियम 2025 से भी भविष्य में आय बढ़ने की संभावना जताई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रशासनिक खर्च कम करने के लिए कई सख्त फैसले लिए हैं।


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