कार्यक्रम को लेकर फैलाई जा रही गलत जानकारी
शिमला,रिपोर्ट नवीन शर्मा
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग द्वारा 23 अप्रैल 2026 को ज्योतिबा फुले की जीवनी पर आयोजित एक शैक्षणिक सत्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। छात्र संगठन एबीवीपी द्वारा विभाग के अधिकारियों का घेराव किए जाने और सोशल मीडिया पर सत्र को लेकर कथित गलत प्रचार किए जाने के बाद स्थिति गरमा गई।
एबीवीपी ने आरोप लगाया है कि उक्त सत्र के दौरान हिंदू धर्म की धार्मिक भावनाओं को आहत किया गया, हालांकि लोक प्रशासन विभाग के छात्रों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। छात्रों ने डीन ऑफ स्टडीज को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि मीडिया के कुछ वर्गों में प्रसारित किए जा रहे दावे भ्रामक और निराधार हैं, जिनकी वे कड़ी निंदा करते हैं।छात्रों का कहना है कि वे स्वयं सत्र के दौरान उपस्थित थे और यह सत्र पूरी तरह अकादमिक, बौद्धिक रूप से प्रेरक तथा खुली चर्चा के ढांचे में आयोजित किया गया था। उनके अनुसार, इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताना तथ्यों की गलत व्याख्या और जानबूझकर किया गया विकृतिकरण प्रतीत होता है, जिससे उच्च शिक्षा के मूल मूल्यों को नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय स्वतंत्र विचार, बहस और अकादमिक आदान-प्रदान का स्थान हैं, और ऐसे में गलत प्रचार व बाहरी दबाव के माध्यम से अकादमिक गतिविधियों को प्रभावित करने का प्रयास निंदनीय है। छात्रों ने एबीवीपी द्वारा सत्र के गलत प्रचार का कड़ा विरोध करते हुए प्रशासन से संगठन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।साथ ही छात्रों ने चेतावनी दी है कि अकादमिक संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप अस्वीकार्य है और इससे विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि किसी भी प्रकार के असत्यापित दावों के आधार पर जल्दबाजी में निर्णय न लिया जाए, क्योंकि इससे अकादमिक स्वतंत्रता को खतरा हो सकता है।लोक प्रशासन विभाग के छात्रों ने स्पष्ट किया कि वे तर्कसंगत विचार-विमर्श, संवैधानिक मूल्यों और शैक्षणिक स्वतंत्रता के पक्ष में दृढ़ता से खड़े हैं और इस तरह के विवादों को बढ़ावा देने वाले प्रयासों को खारिज करते हैं।


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