मतदान केंद्रों पर ड्यूटी बना कर्मचारियों की परेशानी
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे पंचायत चुनाव में लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए फील्ड में उतरे हजारों अधिकारी और कर्मचारी खुद मतदान से वंचित रहेंगे। हिमाचल प्रदेश में 3758 पंचायतों, जिला परिषद के 251 वार्डों, पंचायत समिति के 1769 और 21739 वार्डों में तीन चरणों में चुनाव होने हैं। लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व को सफल बनाने के लिए लगभग 15 हजार सरकारी कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन अब विडंबना यह है कि इन्हीं कर्मचारियों में से हजारों अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। कारण सिर्फ इतना है कि उनकी ड्यूटी उनके अपने ब्लॉक से बाहर लगा दी गई है। क्योंकि पंचायत चुनावो में कई बार जीत-हार का अंतर महज एक-दो वोट तक सिमट जाता है।
वहीं प्रदेश में भी इसको लेकर दर्जनों उदाहरण सामने आ चुके हैं, जहां एक वोट ने प्रधान और उपप्रधान की कुर्सी तय की। ऐसे में चुनाव करवाने वाले कर्मचारियों का खुद वोट न डाल पाना अब चुनावी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कभी चुनाव ड्यूटी से इन्कार नहीं किया। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए वे पूरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन को भी उनकी लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। कर्मचारियों का तर्क है कि यदि उनकी ड्यूटी उनके ही ब्लॉक में लगाई जाती तो वह मतदान कर सकते थे। ऐसे में अब तक व्यवस्था न होने के कारण अब कर्मचारियों ने नाराजगी देखने को मिल रही है। कर्मचारियों का कहना है कि वह वह पूरे दिन मतदान प्रक्रिया संभालेंगे, लेकिन खुद ही वोट नहीं डाल पाएंगे। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है? उधर, दूसरी ओर पंचायती राज विभाग का कहना है कि इस बारे में राज्य निर्वाचन आयोग ही स्थिति स्पष्ट कर सकता है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने बताया कि पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है, वह वोट नहीं दे सकेंगे। कर्मचारी वोट दें, इसे लेकर अधिकारियों के साथ बैठकें हुईं। लेकिन आयोग नतीजे तक नहीं पहुंच पाया है। पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में 1300 पोलिंग पार्टियां बनाई गई हैं। एक पार्टी में 6 अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस और होमगार्ड के जवान अलग से हैं।

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