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चुनावी नतीजे तय करेंगे मंत्रियों-विधायकों का सियासी कद, बनेगा परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड

                       पंचायत चुनाव परिणामों से नेताओं की पकड़ और जनाधार का होगा बड़ा आकलन

शिमला, ब्यूरो रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय और जिला परिषद चुनाव के नतीजे इस बार केवल स्थानीय सियासत तक सीमित नहीं रहेंगे, इनसे सरकार और सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर नेताओं के सियासी कद का भी आकलन होगा। सरकार ने इन चुनावों में पूरी ताकत झोंक दी है। मंत्रियों, चेयरमैन और विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में जीत सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चुनाव परिणाम आने के बाद नेताओं की परफॉर्मेंस का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर यह देखा जाएगा कि किस मंत्री और विधायक ने अपने क्षेत्र में पार्टी को कितनी मजबूती दिलाई और किन क्षेत्रों में पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई। 

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चुनावी नतीजों का असर आने वाले समय में मंत्रिमंडल विस्तार, विभागों में फेरबदल और संगठनात्मक जिम्मेदारियों पर भी दिखाई दे सकता है। प्रदेश मंत्रिमंडल में अभी एक पद रिक्त है। इसके अलावा कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव की संभावना भी लंबे समय से चर्चा में है। ऐसे में स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम कई नेताओं के राजनीतिक भविष्य के लिए अहम माने जा रहे हैं। जिन मंत्रियों और विधायकों के क्षेत्रों में पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी, उन्हें सरकार और संगठन में अधिक महत्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं कमजोर प्रदर्शन करने वाले नेताओं की राजनीतिक पकड़ पर सवाल उठ सकते हैं।


सूत्रों के अनुसार सरकार ने चुनावों को 2027 के विधानसभा चुनावों के सेमीफाइनल के रूप में लिया है। इसी कारण मुख्यमंत्री सहित पूरी सरकार ने चुनाव प्रचार में सक्रिय भागीदारी निभाने की तैयारी की है। बीते कुछ माह में कई क्षेत्रों में मंत्रियों और विधायकों ने लगातार दौरे किए, जनसभाएं कीं और स्थानीय समीकरणों को साधने में पूरी ताकत लगाई। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि स्थानीय निकाय चुनावों का परिणाम जनता के मूड का संकेत देगा और इसी आधार पर आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति तैयार की जाएगी। चुनाव परिणाम आने के बाद सरकार और कांग्रेस संगठन स्तर पर विस्तृत समीक्षा बैठकें होंगी। प्रत्येक जिले और विधानसभा क्षेत्र के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसमें बूथ स्तर तक प्रदर्शन का विश्लेषण किया जाएगा। यही रिपोर्ट आने वाले समय में संगठनात्मक नियुक्तियों, बोर्ड-निगमों में तैनाती और चुनावी रणनीति तय करने का आधार बन सकती है।

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