Ticker

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

भारतीय सेना के लिए लेह पहुंचना होगा आसान, रणनीतिक कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा बल

      सीमावर्ती क्षेत्रों में तेज आवाजाही और सैन्य आपूर्ति को मजबूत करने के लिए अहम परियोजना पर बढ़ा काम
कुल्लू,ब्यूरो रिपोर्ट 
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मनाली-लेह मार्ग के बहाल होने से अब कुछ दिनों बाद भारतीय सेना के लिए लेह पहुंचना आसान हो जाएगा। सीमा सड़क संगठन ने सड़क को हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल कर दिया है। कुछ दिनों बाद बड़े वाहनों के लिए सड़क खुलते ही हिमाचल सीमा सरचू के रास्ते भारतीय सेना के काफिले लेह की ओर रवाना होंगे। 1999 के कारगिल युद्ध के बाद इस सड़क का सामरिक महत्व और बढ़ गया है। देश की सुरक्षा की दृष्टि से यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मनाली-सरचू-लेह मार्ग का वैकल्पिक रूट मनाली-शिंकुला-जांस्कर भी है। यह सड़क सरचू मार्ग से पहले यातायात के लिए खुल जाती है। बीआरओ के अनुसार दारचा-शिंकुला-जांस्कर-लेह मार्ग की कुल दूरी करीब 420 किमी है। इसमें दारचा से शिंकुला टॉप 40 किमी, शिंकुला से पदुम (जांस्कर) 150 किमी और पदुम से लेह वाया निमू 230 किमी है।

दारचा से सरचू होते हुए लेह की दूरी करीब 335 किमी है। बीआरओ के मुताबिक लेह जाने के लिए सरचू रूट दूरी में कम और सड़क की गुणवत्ता में बेहतर है। हालांकि इस मार्ग पर बारालाचा ला, नकी ला, लाचुंग ला और तंगलंग ला जैसे चार-पांच बड़े दर्रे पड़ते हैं, जो सर्दियों में बर्फबारी के कारण बंद रहते हैं।

Post a Comment

0 Comments

ग्रामीण इलाकों में गैस वितरण व्यवस्था चरमराई, उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी