हाई*कोर्ट ने सरकार से मांगा स्पष्टीकरण, नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव पद पर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, केंद्र सरकार और मुख्य सचिव संजय गुप्ता को नोटिस जारी किया है।मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की गई है।
मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की गई है।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने 9 अक्तूबर 2024 को जारी संशोधित दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। इन नियमों के क्लॉज-7 में स्पष्ट किया गया है कि अखिल भारतीय और केंद्रीय सिविल सेवा के अधिकारियों को किसी भी संवेदनशील पद पर नियुक्त करने से पहले उनकी विजिलेंस क्लीयरेंस की जांच अनिवार्य होगी। याचिका में कहा गया कि मुख्य सचिव का पद राज्य प्रशासन का सबसे महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरा पद माना जाता है, इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।

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