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हिमाचल में आलू की फसल पर लेट ब्लाइट का खतरा

                         लेट ब्लाइट ने बढ़ाई किसानों की चिंता! कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट 

हिमाचल प्रदेश में आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की गई है। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई), शिमला ने आगाह किया है कि वर्तमान मौसम की परिस्थितियां आलू की फसल में 'पिछेता झुलसा' (लेट ब्लाइट) रोग के तेजी से फैलने के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। 

इस गंभीर बीमारी से फसल को भारी नुकसान हो सकता है, इसलिए किसानों को समय रहते बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।सीपीआरआई द्वारा विकसित इंडो-ब्लाइटकास्ट (पैन इंडिया) पूर्वानुमान प्रणाली के अनुसार, आने वाले दिनों में इस बीमारी का प्रकोप बढ़ने की प्रबल संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आलू की फसल को भारी क्षति पहुँच सकती है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा।

पौध संरक्षण संभागाध्यक्ष डॉ. संजीव शर्मा ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि जिन खेतों में अभी तक बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं दिए हैं और फफूंदनाशक का छिड़काव नहीं किया गया है, वहां रोग-संवेदनशील किस्मों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसे खेतों में मैन्कोजेब या क्लोरोथलोनील युक्त फफूंदनाशकों का 0.2 से 0.25 प्रतिशत घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 1000 लीटर पानी में 2 से 2.5 किलोग्राम दवा मिलाने की सिफारिश की गई है।डॉ. शर्मा ने आगे बताया कि यदि फसल में लेट ब्लाइट के शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगें, तो किसान कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार डाइमेथोमोर्फ, अमेटोक्ट्रडीन, फ्लुपिकोलाइड, प्रोपामोकार्ब, अजोक्षिस्ट्रोबिन और टेबुकोनाजोल जैसे अनुशंसित फफूंदनाशकों का उपयोग कर सकते हैं।

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