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महिला शक्ति में बहुत क्षमता और को भी मछली पालन सिखाऐंः प्रो.एच.के.चौधरी

◆अतिरिक्त आय और पोषण सुरक्षा के लिए मत्स्य पालन को अपनाएं  

◆प्रगतिशील किसान कृष्ण पाल मछली पालन के क्षेत्र में बनाए कृषि दूत

पालमपुर,रिपोर्ट
चौसकु हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एच.के.चौधरी ने कहा कि महिला शक्ति में बहुत क्षमता है। महिलाएं अन्य लोगों को भी मछली पालन से जोड़ें और उन्हें यह कार्य सीखाऐं। कुलपति प्रो. चौधरी  डा.जी.सी.नेगी पशु चिकित्सा एवम पशु विज्ञान महाविद्यालय में कार्प मछली के बीज उत्पादन और ग्रो आउट कल्चर पर तीन दिवसीय कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम में मत्स्य पालन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में बतौर मुख्यअतिथि प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। कुलपति प्रो. एच.के.चौधरी ने मछली की स्थानीय नस्लों के महत्व को रेखांकित किया और किसानों को अपने परिवारों की अतिरिक्त आय और पोषण सुरक्षा के स्रोत के रूप में मत्स्य पालन को अपनाने की सलाह दी। 

उन्होंने कहा कि नई तकनीक और मछली का वैज्ञानिक पालन किसानों को बाजार में लाभकारी मूल्य प्राप्त करने में सक्षम बना सकता है। कुलपति ने बताया कि राज्य को ताजे पानी के प्रचुर संसाधन मिले हैं जो गुणवत्तापूर्ण मछली उत्पादन के लिए सबसे उपयुक्त हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रशिक्षुओं में 46 कृषक महिलाएं थीं। कुलपति ने कहा कि वह प्रगतिशील किसानों के क्षेत्रों का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि गग्गल से आए प्रगतिशील किसान कृष्ण पाल को विश्वविद्यालय के मछली पालन के क्षेत्र में कृषि दूत होगें। इस दौरान प्रो. चौधरी ने मत्स्य पालन पर एक प्रशिक्षण मैनुअल का विमोचन किया और आए हुए 50 प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र भी वितरित किए।
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. वी.के. शर्मा ने बताया कि राज्य में छह हजार मत्स्य किसान हैं। उन्होंने कहा कि किसान मत्स्य पालन पर नवीनतम जानकारी के लिए विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्रों से संपर्क कर सकते हैं। डॉ जी.सी. नेगी पशु चिकित्सा एवम पशु विज्ञान महाविद्यालय के डीन डा. मंदीप शर्मा ने बताया कि मछली एक उत्कृष्ट भोजन है और मत्स्य पालन और उनके खेत जानवरों पर तकनीकी जानकारी प्राप्त करने के लिए किसानों का स्वागत है। 
मत्स्य विभाग की प्रमुख डॉ डेजी वाधवा ने बताया कि प्रशिक्षण राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड द्वारा प्रायोजित था। इस दौरान डॉ मधु शर्मा, तरंग कुमार शाह और अरुण शर्मा और कुछ प्रगतिशील किसानों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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