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मगरू महादेव का वापसी: 80 वर्षों के बाद शिवरात्रि महोत्सव में उत्सव की रंगत

                        80 साल बाद मगरू महादेव मूल मोहरे के साथ शिवरात्रि महोत्सव में भाग लेंगे

मंडी , ब्यूरो रिपोर्ट 

सिराज घाटी के मगरू मानगढ़ के आराध्य देवता मगरू महादेव छतरी 80 वर्ष बाद मंडी शिवरात्रि महोत्सव में अपने मूल मोहरे (मुख) के साथ आएंगे। मगरू महादेव जिले के एकमात्र देवता हैं, जो 120 किलोमीटर पैदल चलकर छोटी काशी पहुंचते हैं। 80 साल बाद, मगरू महादेव, भगवान भोले नाथ का स्वरूप, मूल मोहरे को रथ पर चढ़ाकर मंडी पहुंच रहे हैं। देवताओं के समाज में देवता के मूल मुख के रथ में सजने का उत्साह है।


इस बार छोटी काशी में देवता के मुख्य मोहरे को देखने के लिए बहुत लोग आने की उम्मीद है। मगरू महादेव छतरी से छोटी काशी में चले गए हैं। देवता 8 मार्च को सिराजघाटी से मंडी पहुंचेंगे, जहां वे राज देवता माधोराय से भव्य मिलन करेंगे। देवता के कारदार कश्मीर सिंह ने देवता के मूल मोहरे के साथ मंडी रवाना होने की पुष्टि की है। 


शिवरात्रि मेले में देवता पहले फर्श पर अपना मूल मुख सुशोभित कर बल्ह के बैहना तक निकलते और वहां से अपने रथ का रूप धारण कर मंडी पहुंचते थे, लेकिन इस बार वे मूल कोठी से ही रथ के रूप में शिरकत करेंगे। रियासत काल में मगरू महादेव का रुतबा राजदेव माधोराय के समान था और शिवरात्रि पर मगरू महादेव का चित्र भी चस्पा होता था। 


राजशाही समाप्त होने के बाद पचास साल तक मगरू महादेव ने शिवरात्रि उत्सव में भाग नहीं लिया था। प्रशासन और सर्व देवता सेवा समिति के आग्रह पर देव मगरू महादेव शिवरात्रि में भाग लेने पहुंचे थे। बड़ा देव हुरंग नारायण मंडी के दौरान नारला से कुन्नू पहुंचे हैं। सैकड़ों लोग देव हुरंग नारायण की पैदल यात्रा कर रहे हैं। देव हुरंग नारायण की बाल लीलाओं का केंद्र नारला गांव रहा है। 


देव हुरंग नारायण कुन्नू से भटेहड़ पहुंचेंगे। रात को पाली के बाड़ी गांव में एक प्राचीन मंदिर में ठहराव करेंगे। गांव में देव नारायण बावड़ी की पूजा करेंगे। आने वाले दिनों में देव नारायण सीह, भटेहड़, पिपली, सिलग, पाली, द्रंग, टांडू, बिजनी से मंडी पहुंचेंगे। बड़ा देव विष्णु मतलोडा मंगलवार को छोटी काशी शिवरात्रि मेले के लिए करोड़ों सोने के रथ में सवार होकर निकला है। 

देवता आठ मार्च को छोटी काशी तक 80 किलोमीटर चलकर राज देवता माधोराय के दरबार में दिव्य मिलन करेंगे। देवता चौहट कोठी से कुल्थनी गांव गए थे, जहां से वे मंगलवार को मंडी शिवरात्रि के लिए चले गए। मंडी शिवरात्रि मेले में भी देवता शैटीनाग शामिल हैं। मंगलवार शाम को वह बालीचौकी पहुंचे थे। कुल्लू जिले के आनी के आराध्य देवता खुड्डी जहल बगस्याड़ पहुंच गए हैं। उनका जगह जगह भव्य स्वागत है।

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