अगली सुनवाई में होगा फैसला
शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने प्रतिवादी निजी ठेकेदार सूर्या कंपनी की ओर से दायर उस आवेदन पर राहत देने से इन्कार कर दिया है, जिसमें उनके रोके गए भुगतान को जारी करने की मांग की गई थी। वेकेशन जज न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने स्पष्ट किया है कि मुख्य खंडपीठ की ओर से दिए गए आदेशों में वेकेशन बेंच तब तक हस्तक्षेप नहीं कर सकती, जब तक कि ठोस कारण न दिए जाए।
अदालत ने पाया कि आवेदन में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि नोटिस मिलने के बावजूद ठेकेदार पिछली सुनवाई पर कोर्ट में पेश क्यों नहीं हुआ।कोर्ट ने कहा कि भुगतान रोकने का निर्णय मुख्य खंडपीठ का है। वेकेशन बेंच इस आदेश में तब तक बदलाव नहीं कर सकती जब तक कि अनुपस्थिति का कोई ठोस और तर्कसंगत कारण न दिया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले के गुणों पर फैसला मुख्य खंडपीठ ही करेगी। कोर्ट ने इस आवेदन को अब मुख्य खंडपीठ के समक्ष उसी तिथि पर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, जो पहले से तय की गई है। तब तक ठेकेदार के भुगतान पर लगी रोक बरकरार रहेगी।यह मामला एनएच 03 मंडी धर्मपुर सड़क निर्माण से संबंधित है। जनहित याचिका में सुनवाई के दौरान ठेकेदार कंपनी को नोटिस जारी किया था। बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद, उक्त प्रतिवादी 5 जनवरी 2026 को अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने आदेश दिया था कि प्रतिवादी गावर कंपनी तब तक सूर्या कंपनी का कोई भी भुगतान जारी न करे, जब तक कि वे अदालत में पेश नहीं होते।खंडपीठ के इस आदेश के खिलाफ ठेकेदार कंपनी की ओर से वेकेशन जज के समक्ष एक आवेदन दायर किया गया।सूर्या कंपनी की ओर से दलील दी गई थी कि मुख्य कंपनी (गावर कंस्ट्रक्शन) ने उनके 12 करोड़ के बिल रोक लिए हैं।भुगतान न मिलने से वे आगे का काम नहीं कर पाएंगे और उन्हें भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने गलत तथ्य पेश किए हैं। गावर कंपनी ने एन एच 70 तल्यार से लगधार के निर्माण कार्यों का ठेका किसी दूसरी कंपनी को दिया है। इससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने अदालत से खंडपीठ की ओर से पारित पिछले आदेशों में संशोधन करने और रोके गए भुगतान राशि को जारी करने की मांग की थी। इस मामले की सुनवाई अब 30 मार्च को होगी।

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