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एचपीयू में सस्ती प्रिंटिंग सुविधा बंद करने के फैसले के खिलाफ एसएफआई का प्रदर्शन, अधिसूचना वापस लेने की मांग

  सस्ती प्रिंटिंग सेवा बहाल करने और अधिसूचना वापस लेने की मांग को लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी

शिमला,रिपोर्ट नवीन शर्मा 

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय कैंपस इकाई ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय में संचालित कम लागत वाली प्रिंटिंग सुविधा को प्रतिबंधित करने संबंधी हालिया अधिसूचना का कड़ा विरोध जताया है। इस मुद्दे को लेकर एसएफआई प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को पुस्तकालयाध्यक्ष (लाइब्रेरियन/इंचार्ज) से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग उठाई।इस संबंध में जानकारी देते हुए एसएफआई कैंपस संयुक्त सचिव किशोर कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब छात्र पहले ही परीक्षा शुल्क, छात्रावास शुल्क, पुनर्मूल्यांकन शुल्क, रिपेयर शुल्क समेत विभिन्न फीसों में लगातार बढ़ोतरी से आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि वर्षों से विश्वविद्यालय पुस्तकालय में छात्रों को कम दरों पर उपलब्ध करवाई जा रही प्रिंटिंग और ज़ेरॉक्स सुविधा हजारों विद्यार्थियों के लिए बड़ा शैक्षणिक सहारा रही है। ऐसे में इस सुविधा को सीमित करना छात्रों पर एक और अप्रत्यक्ष आर्थिक बोझ डालने जैसा है।एसएफआई नेताओं ने कहा कि गरीब, ग्रामीण, मेहनतकश औरमध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले छात्र अपनी पढ़ाई से जुड़े जरूरी कार्यों — जैसे असाइनमेंट, शोध-पत्र, डिसर्टेशन, सेमिनार पेपर, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, जर्नल, प्रवेश पत्र, परीक्षा प्रपत्र और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों — की प्रिंटिंग के लिए पुस्तकालय की इस सस्ती सुविधा पर निर्भर रहते हैं। यदि यह सुविधा बंद होती है तो छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर के बाहर निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ेगा, जहां प्रिंटिंग की लागत काफी अधिक है।

एसएफआई ने पुस्तकालय प्रशासन से मांग की कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रिंटिंग सुविधा पर लगाए गए प्रतिबंध को तुरंत वापस लिया जाए और पहले की तरह कम लागत पर सुविधा बहाल रखी जाए। संगठन ने यह भी कहा कि छात्रों को प्रभावित करने वाले किसी भी निर्णय से पहले छात्र प्रतिनिधियों से चर्चा की जानी चाहिए।एसएफआई उपाध्यक्ष कॉमरेड आशीष ने कहा कि विश्वविद्यालय पुस्तकालय केवल किताबों तक सीमित संस्थान नहीं है, बल्कि यह छात्रों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा को सुलभ और किफायती बनाने के बजाय इस प्रकार की सुविधाओं को सीमित करनविश्वविद्यालय प्रशासन की छात्र कल्याण नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।एसएफआई ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो संगठन छात्र हितों और सस्ती शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए अपने लोकतांत्रिक आंदोलन को और तेज करेगा।

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