शिमला,ब्यूरो रिपोर्ट
ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। शिक्षा, खेल, कला और स्वरोजगार के माध्यम से वे अपनी अलग पहचान बना रही हैं। चौकी जमवाला की लिपाक्षी ने सिलाई-कढ़ाई के हुनर को अपनी ताकत बनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद जहां अधिकांश युवा नौकरी की तलाश में भटकते हैं, वहीं लिपाक्षी ने घर से ही अपना छोटा-सा कारोबार शुरू किया और आज वह डिजाइनर सूट तैयार कर हर माह हजारों रुपये की कमाई कर रही है।
कि वह काम के साथ-साथ प्राइवेट एमए की पढ़ाई भी कर रही है। लिपाक्षी को बचपन से ही सिलाई और कढ़ाई में रुचि थी। घर में जब भी कोई नया कपड़ा आता, तो वह उसके डिजाइन और सिलाई को बड़े ध्यान से देखती थीं। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने हाथ से कढ़ाई करना सीख लिया था। धीरे-धीरे उनका यह शौक हुनर में बदल गया। परिवार वालों ने भी उनकी रुचि को समझते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद लिपाक्षी के सामने भी अन्य युवाओं की तरह रोजगार का सवाल था लेकिन उन्होंने नौकरी की तलाश में समय गंवाने के बजाय अपने हुनर को ही रोजगार का माध्यम बनाने का निर्णय लिया।
घर में ही सिलाई मशीन लगाकर महिलाओं और युवतियों के कपड़े सिलने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनके बनाए सूट और डिजाइन महिलाओं को पसंद आने लगे। आसपास के गांवों से महिलाएं और युवतियां उनके पास डिजाइनर सूट सिलवाने लगीं। खासतौर पर पंजाबी सूट, प्लाजो सूट, अनारकली डिजाइन, पार्टी वियर सूट और हाथ की कढ़ाई वाले परिधानों की काफी मांग बढ़ी। आज लिपाक्षी का छोटा-सा काम एक अच्छे स्वरोजगार में बदल चुका है। वह घर से ही सिलाई-कढ़ाई का काम कर रही हैं और हर महीने हजारों रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। त्योहारों और शादी के सीजन में उनके पास काम की भरमार रहती है।


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