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दुर्गम क्षेत्र लाहौल घाटी के योचे गांव में स्वास्थ्य जैसी मुलभूत सुविधाएं न होने से 62 लोगों ने गांव छोड़ दिया

                                                    बर्फबारी से मजबूर...62 लोग अपने गांव से हुए दूर

कुल्लू,ब्यूरो रिपोर्ट 

दुर्गम क्षेत्र लाहौल घाटी के योचे गांव में स्वास्थ्य जैसी मुलभूत सुविधाएं न होने से 62 लोगों ने गांव छोड़ दिया है। अब ये लोग सर्दी खत्म होने के बाद अप्रैल में अपने गांव वापस आएंगे। हर साल सर्दी के मौसम में इनका गांव से बाहर जाना मजबूरी बन गई है। दारचा पंचायत के अंतर्गत 15 घरों की आबादी वाले इस गांव में स्वास्थ्य केंद्र तक की सुविधा नहीं है। 

योचे गांव दारचा से 12 किलोमीटर की दूरी पर है। सर्दी के दिनों में क्षेत्र में भारी बर्फबारी होती है। ऐसे में अगर गांव के लोग बीमार पड़ जाए तो उसे पीएचसी दारचा भी नहीं जाया जा सकता है। लोगों को बुखार और खांसी की दवा लेने के लिए भी गांव से 12 किलोमीटर दूर दारचा आना पड़ता है। इस तरह की समस्या होने से गांव के लोग सर्दी आने पर जिले से बाहर पलायन करते हैं।जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी के योचे गांव की आबादी 119 लोगों की है। यहां पर 33 बड़े और चार बच्चे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि इस समय योचे गांव से 82 लोग बाहर हैं। 

इसमें कुछ सरकारी कर्मचारी और बाहर पढ़ने वाले बच्चे शामिल है, लेकिन 62 के करीब योचे गांव के लोगों को मुलभूत सुविधाओं के अभाव में गांव से बाहर जाना पड़ा है।सर्दी का मौसम आते ही योचे गांव के लोगों को हमेशा 2 मार्च, 2015 के दिन की याद आती है। 2 मार्च, 2015 सुबह के चार बजे गांव में कुछ घरों और प्राइमरी पाठशाला को एक हिमखंड ने अपनी जद में ले लिया था। गांव में संपर्क न होने के चलते और जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा और प्रशासन की टीम 17 मार्च को गांव पहुंची थी। गांव के लोगों को हिमखंड गिरने का डर हमेशा सताता रहता है।



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