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चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन में लोगों के मकान और पेड़ आने से निर्माण कार्य प्रभावित

                                                  छह महीने में रेल लाइन तैयार करने का है लक्ष्य

सोलन,ब्यूरो रिपोर्ट 

चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन में लोगों के मकान और पेड़ आने से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। रेलवे की 34.67 हेक्टेयर में से 4,000 वर्ग मीटर जमीन पर लोगों के मकान और पेड़ हैं। रेलवे बोर्ड प्लेटफार्म तो तैयार कर रहा है, लेकिन बीच में पेड़ होने से काम रुक गया है। अब यहां नए सिरे से काम होगा। चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन बिछाने का काम कार्य चल रहा है।

हिमाचल क्षेत्र में 34.67 हेक्टेयर पर रेल लाइन बननी है। हिमाचल में चार प्लेटफार्म, आवासीय कॉलोनी और टिकट भवन का निर्माण होना है। भवन का काम तो सुचारु चल रहा है, लेकिन प्लेटफार्म, पुलिया और अंडरपास का काम प्रभावित हो रहा है।अभी तक 4,000 वर्ग मीटर जमीन का किसानों को मुआवजा नहीं मिला है, वहीं पेड़ों और मकान का पैसा नहीं मिला है। इस कारण लाइन बिछाने का कार्य बाधित हो रहा है। छह महीने में रेल लाइन तैयार करने का लक्ष्य है। हिमाचल में रेलवे लाइन की जमीन पर 73 पेड़ हैं। आठ मकान और भवन हैं। इसके अलावा चार स्थानों पर जमीन और बगीचे हैं। किसानों ने अपनी जमीन में बाड़बंदी की हुई है। ऐसे में किसान मुआवजा मिलने के बाद ही अपनी जमीन रेलवे को देंगे। रेल लाइन में बिजली की छह लाइनें हैं, दो लाइनों को हटा दिया गया है।

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बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता दीपक वर्मा ने बताया कि बिजली की चार लाइनों के हटाने के टेंडर हो चुके हैं और विभाग की ओर से जल्द इन लाइनों को हटा दिया जाएगा।रेल लाइन से पेड़ों को कटवाने के लिए प्रशासन ने पिछले साल छह अप्रैल को अवॉर्ड बनाकर वन विभाग के अरण्यपाल को अप्रूवल के लिए भेजा था। अभी तक अप्रूवल नहीं मिली है। पैसा आ गया है, लेकिन कुछ भवन मालिकों ने औपचारिकताएं पूरी न करने पर अभी तक मुआवजा नहीं लिया है। जो जमीन अधिग्रहण की है, अगर कोई किसान रह गया है तो उसे भी मुआवजा दे दिया जाएगा।





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