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आखिर कुल्लू में कैसे हुआ पर्यटकों का आगमन

                                                    पर्यटकों का तिलक लगाकर आदर सत्कार

कुल्लू,ब्यूरो रिपोर्ट 

जिले की मणिकर्ण घाटी पहुंचे रहे सैलानियों का अतिथि देवो भव की तर्ज पर आदर सत्कार किया जा रहा है। होटल कर्मचारी प्रवेश करने से पहले पर्यटकों को पूजा की थाली सजाकर तिलक लगा रहे हैं। साथ ही माला पहनाई जा रही है। आदर सत्कार देखकर पर्यटक भी खुश हैं।कसोल, मणिकर्ण और कुल्लू में अतिथि सत्कार देखकर पर्यटक भी खुश हो रहे हैं। इतना ही नहीं, खाने में पर्यटकों की पसंद के साथ स्थानीय व्यंजन भी परोसे जा रहे हैं।

सैलानी सिड्डू, कुल्लवी धाम के चटकारे ले रहे हैं। तीर्थन नदी में पाए जाने वाली ट्राउट मछली के भी पर्यटक मुरीद हो रहे हैं। कुल्लू में पर्यटन सीजन इस बार अच्छा चल रहा है। मैदानी क्षेत्रों से पर्यटक पहाड़ों का रुख कर रहे हैं। कसोल, मणिकर्ण और मनाली के होटलों के 90 फीसदी तक कमरे बुक हैं। बंजार की तीर्थन घाटी में होम स्टे पैक हो रहे हैं।जाणा वाटर फॉल में मिलने वाला शुद्ध देसी से बना खाना भी पर्यटकों को लुभा रहा है। यहां पर पर्यटकों के लिए लाल चावल, बिच्छू बूटी की सब्जी, चटनी, सिड्डू आदि व्यंजन परोसे जा रहे हैं।

मणिकर्ण घाटी के होटल कारोबारी शेर सिंह नेगी ने कहा कि कुल्लू की परंपरा के अनुसार होटल में आने वाले मेहमानों का स्वागत अतिथि देवो भव की तर्ज पर किया जा रहा है। पर्यटकों को मालाएं पहनाकर उनका सत्कार किया जा रहा है। कुल्लू में आने वाले पर्यटक अपने साथ अविस्मरणीय यादें लेकर लौट रहे हैं। वीकेंड के लिए कमरों की बुकिंग दो-तीन पूर्व ही हो रही है।दिल्ली से मणिकर्ण घाटी में परिवार के साथ घूमने आए अजीत सिंह ने कहा कि वह मणिकर्ण घाटी की वादियों में घूमने आए हैं। 23 जून को उन्होंने चैक इन किया। यहां पर जिस तरह का आतिथ्य सत्कार हुआ है, यह अलग अनुभव है। हिमाचल के लोग भोले-भाले होते हैं। यहां की परंपराएं, प्राकृतिक सुंदरता और बर्फीले पहाड़ इसे अलग बनाते हैं।




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