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डीजल इंजन से फसलों को सिंचित करने वाले किसानों का बढ़ गया आर्थिक बोझ

                           तीखी धूप से मुरझा रही फसलें, हर दूसरे दिन फसलों की करना पड़ रही सिंचाई

ऊना,ब्यूरो रिपोर्ट 

जिला में तापमान 45 डिग्री के आसपास चल रहा है। आम लोगों के साथ-साथ किसानों को प्रचंड गर्मी व तेज धूप से दोगुनी परेशानी उठानी पड़ रही है। अगेती मक्की, हरी सब्जियों को तैयार करने में जुटे किसानों को हर दूसरे दिन सिंचाई करनी पड़ रही है।वहीं, बिजली की मोटर लगाकर ट्यूबवेल से सिंचाई करने वाले किसानों को तो फिर भी आर्थिक तौर पर अधिक जहमत नहीं उठानी पड़ती, लेकिन डीजल इंजन के जरिए ट्यूबवेल से सिंचाई करने वालों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार जिले में इस समय जो किसान फसलें तैयार कर रहे हैं, उनमें करीब 50 प्रतिशत ऐसे हैं, जिनके पास अभी भी डीजल इंजन हैं। 

इसका मुख्य कारण यह है कि कई खेत ऐसे स्थानों पर है, जहां न बिजली की तारें पहुंची हैं और न जल शक्ति विभाग की ओर से कोई सिंचाई सुविधा की व्यवस्था है। ऐसे में किसानों को मजबूरी में डीजल इंजन लगाकर सिंचाई करनी पड़ती है, क्योंकि अधिकतर खेती स्वां नदी के आसपास के इलाकों में होती है। इस इलाके में कई जगह बिजली सप्लाई अभी तक नहीं पहुंची है।स्वां नदी के पास खेती करने वाले किसान राहुल कुमार, हरबंस लाल, अमन कुमार, दीवान चंद, ब्रह्मदास ने कहा कि बिजली की मोटर लगाना एक अच्छा विकल्प है, लेकिन इसके लिए अभी विद्युत सप्लाई की सुविधा नहीं है। मजबूरी में डीजल इंजन से सिंचाई करनी पड़ती है। उन्हाेंने कहा कि अधिकतर गांवों में जल शक्ति विभाग की सिंचाई सुविधा वहीं तक सीमित है, जहां किसानों के पास अपने स्तर पर कोई सिंचाई सुविधा नहीं है। 

जहां सिंचाई के विकल्प हैं, वहां किसानों को अपने स्तर पर ही ट्यूबवेल स्थापित करने पड़ते हैं।किसानों को काफी समय से बारिश का इंतजार है। फसलों के लिहाज से बारिश होना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों की मानें तो बिना बारिश के फसलों की वृद्धि बेहद धीमी गति से हो रही है। बेशक किसान सिंचाई में कोई कमी नहीं छोड़ रहे, लेकिन बारिश फसलों के लिए वरदान है और इसके अपने लाभ होते हैं।जिले के किसान मौसम की विभिन्न परिस्थितियों में फसलें तैयार करने का हुनर जानते हैं। हालांकि बारिश का होना अपना अलग महत्व रखता है। उम्मीद करते हैं कि जल्द बारिश होगी, जिससे फसलों को लाभ मिलेगा। वर्तमान में फसलों के लिहाज से बनी विषम परिस्थिति में किसी प्रकार के मार्गदर्शन के लिए किसान कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।




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